भ्रष्टाचार की पाठशाला बिसरा का सरकारी हिन्दी उच्च प्राथमिक विद्यालय
सुंदरगढ़ जिला में स्थित बिसरा पंचायत का सरकारी हिन्दी उच्च प्राथमिक विद्यालय के संबंध में सूचना का अधिकार के तहत जो जानकारी प्राप्त हुई है उसमें भ्रष्टाचार होता साफ देखा जा सकता है।
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एक ओर जहाँ विद्यालय की शिक्षिका इंदुराय का हाई स्कूल प्रमाण पत्र फर्जी होने के सबूत आएने की तरह साफ है। वहीं दूसरी ओर वेतन के मामले भी भ्रष्टाचार होता नजर आ रहा है। इस विद्यालय में कार्यरत शिक्षको उनका पद और उन्हें मिलने वाली वेतन देखा जाए तो कुछ ऐसा ही लग रहा है।
शिक्षको की शैक्षणिक योग्यता, नियुक्ति तारीक,पद और वेतन से संबंधित जानकारी जो सूचना का अधिकार के तहत मिली है, उसके अनुसार विद्यालय की प्रधानाध्यापिका सविता जेना जो पूरक परीक्षा (Compartmental) देकर हाई स्कूल पास है और माध्यमिक शिक्षक प्रशिक्षण (CT) का कोर्स कर शिक्षक बनी है उन्हें प्रतिमाह 48,200 रुपये वेतन के साथ महंगाई भत्ता (DA) मिलता है। और इनकी नियुक्ति दिनांक 15-10-2019 को हुई थी।
जबकि इस विद्यालय में झूमा पटनायक (BA, Bed,OTET) नामक अध्यापिका डिस्टिंक्शन के साथ प्रथम श्रेणी से स्नातक पास होने के साथ ओड़िशा शिक्षक पात्रता परीक्षा (OTET) उत्तीर्ण है,इनकी नियुक्ति दिनांक 29-11-2012 को हुई है। प्रमाणपत्र बताते है कि इन्होने नियमित पढाई की है। इन्हें वेतन के रूप में प्रति माह 26,600 रुपये और महंगाई भत्ता मिलता है।
उसी तरह सुजाता महापात्रा स्नातक पास है और माध्यमिक शिक्षक प्रशिक्षण उत्तीर्ण है। इनकी नियुक्ति दिनांक 25-06-2012 में हुई थी। इन्हें प्रतिमाह 25,000 वेतन और महंगाई भत्ता मिलता है। अध्यापक शिवा प्रसाद बारिक इंटर पास है और माध्यमिक शिक्षक प्रशिक्षण उत्तीर्ण है। इन्होने इंटर की पढ़ाई प्राइवेट तौर पर की है, इनकी नियुक्ति दिनांक 04-09-2007 को हुई थी।इनका वेतन 29,000 रुपये प्रति माह है, इन्हें भी मंहगाई भत्ता मिलता है।
उपरोक्त बातों पर ध्यान दिया जाए तो ऐसा लगता है कि इस विद्यालय में कार्यरत अध्यापिका इंदु राय और सविता जेना को उच्चाधिकारीयों की विशेष कृपा प्राप्त है। क्योंकि इंदुराय जहाँ फर्जी प्रमाणपत्र लगाकर समाज का एक प्रतिष्ठित पद (अध्यापिका) को कलंकित करने के साथ एक योग्य उम्मीदवार का हक मारकर सरकारी वेतन पर ऐस कर रही है वहीं पूरक परीक्षा (compartmental) देकर हाईस्कुल पास होने वाली सविता जेना जो इस विद्यालय में कार्यरत अन्य शिक्षको के मुकाबले कम पढी़लिखी है और कम अनुभवी है, उन्हें प्रधानाध्यापिका जैसी महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त कर सबसे अधिक वेतन दिया जा रहा है।
शायद यही वजह रही होगी की प्रधानाध्यापिका सविता जेना सूचना मांगने वाले पर भड़क उठी थी।





